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नंबर वन हरियाणा

          By Mukesh Digani

          हरियाणा में गिरता लिंगानुपात आज वहाँ के सामाजिक –सांस्कृतिक परिवेश को तहस –नहस कर रहा है. इसके  दुष्परिणाम महिलाओं के साथ बढते अत्याचार के रूप में आज हमारे सामने आ रहे हैं.

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          देश के सामने आज हरियाणा की तस्वीर एक प्रगतिशील, विकसित राज्य के रूप में पेश की जा रही है. हरियाणा सरकार अपने आप को स्वयं ही खुद को देश का नंबर वन राज्य का दर्जा देती है. सरकार के अनुसार हरियाणा खेती में (पैदावर में ), खेलो में , शिक्षा में (तकनीकी शिक्षा ) में और इण्डस्ट्रीज में नंबर वन हैं. राज्य में लड़कियों की शिक्षा कॉलेज स्तर तक मुफ्त है.

          यदि यह सरकारी आंकड़े सच भी मान जाएँ, फिर भी ये तस्वीर का सिर्फ एक ही पहलू है. तस्वीर का दूसरा पहलू उतना ही भयावक है. आइये इस पर भी एक नज़र डाले. देश में सबसे कम लिंगानुपात हरियाणा में ही है एक हज़ार लड़कों के पीछे हरियाणा में सिर्फ आठ सौ तीस लड़किया है यानि यहाँ भी हरियाणा नंबर वन है.

          2011 की जनगणना के समय, देश में सबसे कम लिंगानुपात वाले दस जिलों को चिनहित किया गया. जनसंख्या के हिसाब से देश में सतरवहे (17) स्थान पर व क्षेत्रफल के हिसाब  से देश में बीसवें स्थान पर  आनेवाला हरयाणा यहाँ भी नंबर वन है.

          देश के इन दस में से छह जिले दुर्भाग्य से हरियाणा में है राज्यों के कुछ जिलों में तो 2001 की जनगणना के बाद लिंगानुपात में कुछ सुधार हुआ. लेकिन कुछ जिलों में लिंगानुपात अभी भी तेजी से गिर रहा है. विशेषकर झज्जर में हालत बेहत खराब है.

          2001 में झज्जर जिले में लिंगानुपात 801 था जो की 2011 की जनगणना में घटकर 774 रह गया है ,यही हालत कमोपेश रेवाड़ी, महेंदर्गढ़,फरीदाबाद की है . सभी सरकारी और गेर सरकारी प्रयासों के बावजूद हालत बत से बदतर होती चली जा रही हैं.

          एक हज़ार लड़कों के पीछे आठ सौ तीस लड़कियों लड़कियों के आंकड़े के पीछे भी एक बड़ा योगदान मेवात जैसे जिलों का है जहाँ का लिंगानुपात 903 है, जो की हरियाणा में सबसे ज्यादा है,पर इस अनुपात का मतलब ज़रूरी नहीं हैं की मेवात में बेटियों का सम्मान होता हैं.

          हकीकत यह हैं की मेवात हरियाणा का सबसे पिछड़ा हुआ जिला है. जहाँ शिक्षा का स्तर सबसे कम है साथ ही साथ यह आज भी आधुनिक विकास से अछूता है. मेवात में चिकत्सीय सुविधाओं की बहेद कमी है  और लिंग जाचं की सुविधा या कहें तो सोनोग्राफी के मशीन के कमी के कारण लोग लिंग जांच नहीं करा पाते।

          शिक्षा के पिछडेपन के कारण जिले के ग्रामीण इलाको के लोगों को इस बारे में कम जानकारी है तथा धार्मिक मान्यतो के चलते गर्भपात् नहीं करवाते। चार या पांच लड़कियों के बाद भी  अक्सर अगला बच्चा लड़के की उम्मीद में बेटियाँ पैदा होती जाती है ना की लड़की के लिए. इससे ही पता चलता है की वहाँ भी लोग बेटोँ की ही इच्छा रखते है और दुःख की बात ये है की बेटे की इच्छा में पैदा हुई इन बेटीयों को कभी भी ना तो बराबरी का अधिकार मिलता है ना ही सम्मान.

          यूनाइटेड नेशन ऑफिस ओन ड्रग्स एंड क्राइम की 2013 की  रेसेअर्च से यह पता चलता हैं की हरियाणा के अधिकांश जिल्हों में रिसर्च रिपोर्ट बताती है की हरियाणा में सबसे ज्यादा  औरतो की खरीद-फरोत में बढ़ोतरी हो रही है. मेवात जिले में ही होती है, बाहर से शादी के लिए खरीद कर लाई गई औरतों (शादी के लिए ) को यहाँ पारो के नाम से पुकारा जाता है।  आज यही स्थिति हरियाणा के अधिकांश जिलों की है की शादी की उम्र में भी लड़कों की शादी नहीं हो पा रही और इसका मुख्य कारण घटता लिंगानुपात है।

          आंकडों की माने तो हरियाणा में एक हजार में शादी की उम्र के लड़कों में से एक सौ तीस बिना शादी के रह जाते हैं। आज शादी के लिए बाहर के राज्यों से लड्कियों को खरीद कर लाना आम बात बन गयी है ,गिरते लिंगानुपात के चलते आज शादी के लिये लड्कियों की कमी हुई है जिसने बहुत हद तक हरियाणा के सामाजिक’सांस्कृतिक परिवेश की संरचना को तोडा है और समाज पहले के मुकाबले और भी औरत  विरोधी हुआ है।

          आज शादी के लिए बाहर के राज्यों से लड्कियों को खरीद कर लाना आम बात बन गयी है ,गिरते लिंगानुपात के चलते आज शादी के लिये लड्कियों की कमी हुई है जिसने बहुत हद तक हरियाणा के सामाजिक’सांस्कृतिक परिवेश की संरचना को तोडा है और समाज पहले के मुकाबले और औरत  विरोधी हुआ है। पूरे हरियाणा में ट्रैफिकिंग (बाहर के राज्यों से लड़कियों को खरीद कर लाना ) करके ब्याcहने का पिछले कुछ सालों में चलन बढा है।

          गिरते लिंगानुपात का यह तो सिर्फ एक दुष्परिणाम है, आज हरियाणा ‘रेप स्टेट’ के नाम से जाना जा रहा है, हर दिन राज्य में कही ना कही से बलत्कार की कोई नयी घटना सुनने को मिलती है.  हॉनर किलिंग और घरेलू हिंसा  के लिए तो हरियाणा पहले से ही बदनाम सुर्ख़ियों में रहा है. ऐसे में ये सवाल मन में उठना वाजिब है की आखिर इस समस्या का हल क्या है? किसी भी समस्या का समाधान जानने के लिए हमे पहले समस्या के कारणों को जानना होगा की आखिर हरियाणा के लोग हमें बेटे की चाह ही क्यों हैं और बेटियों से यह परहेज क्यूँ? बेटा ही क्यों चाहते है, बेटियां क्यों नहीं?

          The writer is a Breakthrough staffer and works in Haryana on the issue of gender biased sex selection.

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